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H. pylori में आयुर्वेदिक आहार एवं घरेलू देखभाल

H. pylori क्या है?

H. pylori यानी Helicobacter pylori एक प्रकार का bacteria है जो पेट की अंदरूनी lining में संक्रमण उत्पन्न कर सकता है। कई लोगों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, जबकि कुछ लोगों में पेट में जलन, ऊपरी पेट में दर्द, गैस, डकार, पेट फूलना, मितली, भूख में कमी तथा अपच जैसी समस्या हो सकती है।

H. pylori के कारण gastritis और peptic ulcer जैसी स्थितियाँ भी हो सकती हैं। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर कुछ गंभीर complications का जोखिम बढ़ सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से ऐसे लक्षणों का मूल्यांकन मुख्यतः पित्त विकृति, अग्निमांद्य, अजीर्ण तथा आम की स्थिति के संदर्भ में किया जाता है।

H. pylori में आहार का उद्देश्य

आहार का उद्देश्य पेट पर अनावश्यक irritation कम करना, अग्नि को संतुलित रखना, पित्त को शांत रखना और भोजन को सुपाच्य बनाना है।

H. pylori infection को केवल diet से समाप्त करने का दावा नहीं किया जाना चाहिए। Diet supportive भूमिका निभाती है और confirmed infection में चिकित्सकीय evaluation एवं उचित उपचार आवश्यक है।

H. pylori में क्या खाना चाहिए?

सुबह का भोजन

•⁠ ⁠गुनगुना पानी
•⁠ ⁠मूंग दाल का हल्का चीला
•⁠ ⁠दलिया
•⁠ ⁠ओट्स
•⁠ ⁠नरम खिचड़ी
•⁠ ⁠पका हुआ पपीता
•⁠ ⁠भीगे हुए बादाम उचित मात्रा में

भोजन बहुत गर्म या बहुत ठंडा न लें।

दोपहर का भोजन

•⁠ ⁠मूंग दाल
•⁠ ⁠जौ या गेहूँ की रोटी
•⁠ ⁠मूंग की खिचड़ी
•⁠ ⁠लौकी
•⁠ ⁠तोरी
•⁠ ⁠परवल
•⁠ ⁠कद्दू
•⁠ ⁠गाजर
•⁠ ⁠पकी हुई हरी सब्जियाँ
•⁠ ⁠थोड़ी मात्रा में घी

भोजन ताजा, गर्म और सुपाच्य रखें।

शाम का नाश्ता

•⁠ ⁠पका हुआ पपीता
•⁠ ⁠सेब
•⁠ ⁠नाशपाती
•⁠ ⁠मखाना
•⁠ ⁠हल्का दलिया
•⁠ ⁠सौंफ की थोड़ी मात्रा

रात का भोजन

•⁠ ⁠मूंग दाल की खिचड़ी
•⁠ ⁠दलिया
•⁠ ⁠लौकी या तोरी की सब्जी
•⁠ ⁠हल्की दाल
•⁠ ⁠जौ या गेहूँ की रोटी उचित मात्रा में

रात्रि भोजन हल्का रखें और सोने से लगभग 2–3 घंटे पहले करें।

H. pylori में कौन से फल खाएँ?

बेहतर विकल्प

•⁠ ⁠पपीता
•⁠ ⁠सेब
•⁠ ⁠नाशपाती
•⁠ ⁠अनार
•⁠ ⁠मीठा अमरूद, यदि अनुकूल हो
•⁠ ⁠केला, यदि इससे गैस या भारीपन न बढ़े
•⁠ ⁠नारियल पानी, यदि व्यक्ति को अनुकूल हो

फल ताजा और उचित मात्रा में लें।

किन फलों से बचें या सीमित करें?

यदि इनसे पेट में जलन या acidity बढ़ती हो तो मात्रा कम करें:

•⁠ ⁠बहुत खट्टा नींबू
•⁠ ⁠कच्चा आम
•⁠ ⁠इमली
•⁠ ⁠बहुत खट्टा संतरा
•⁠ ⁠अत्यधिक खट्टे फल
•⁠ ⁠बहुत अधिक अनानास
•⁠ ⁠packaged fruit juice

फलों का juice लेने की बजाय साबुत फल लेना बेहतर है।

कौन से अनाज खाएँ?

•⁠ ⁠जौ
•⁠ ⁠गेहूँ
•⁠ ⁠दलिया
•⁠ ⁠ओट्स
•⁠ ⁠चावल उचित मात्रा में
•⁠ ⁠मूंग दाल की खिचड़ी

अनाज को अच्छी तरह पकाकर और सुपाच्य रूप में लें।

किन अनाज एवं खाद्य पदार्थों से बचें?

•⁠ ⁠मैदा
•⁠ ⁠bakery products
•⁠ ⁠बहुत अधिक refined food
•⁠ ⁠बहुत तला हुआ भोजन
•⁠ ⁠packaged snacks
•⁠ ⁠बहुत अधिक सूखा भोजन
•⁠ ⁠अत्यधिक processed food

H. pylori में कौन सी सब्जियाँ खाएँ?

•⁠ ⁠लौकी
•⁠ ⁠तोरी
•⁠ ⁠परवल
•⁠ ⁠कद्दू
•⁠ ⁠गाजर
•⁠ ⁠भिंडी
•⁠ ⁠पकी हुई पालक, यदि अनुकूल हो
•⁠ ⁠पत्तागोभी, यदि इससे गैस न बढ़ती हो

सब्जियों को अच्छी तरह पकाकर लें।

किन खाद्य पदार्थों से परहेज करें?

•⁠ ⁠बहुत तीखी मिर्च
•⁠ ⁠अत्यधिक मसाले
•⁠ ⁠बहुत खट्टा भोजन
•⁠ ⁠अचार
•⁠ ⁠इमली
•⁠ ⁠vinegar की अधिकता
•⁠ ⁠बहुत तला हुआ भोजन
•⁠ ⁠बहुत अधिक तेल
•⁠ ⁠बहुत अधिक coffee
•⁠ ⁠अत्यधिक चाय
•⁠ ⁠carbonated drinks
•⁠ ⁠alcohol
•⁠ ⁠smoking
•⁠ ⁠बहुत अधिक chocolate, यदि इससे acidity बढ़ती हो

हर व्यक्ति में trigger foods अलग हो सकते हैं। जिस भोजन से लगातार जलन, दर्द या acidity बढ़ती हो, उसे कुछ समय के लिए सीमित करें।

आयुर्वेदिक घरेलू उपाय

1.⁠ ⁠धनिया

धनिया को आयुर्वेद में पित्तशामक एवं दीपन-पाचन गुणों के लिए उपयोग किया जाता है। धनिया का हल्का पेय व्यक्ति की प्रकृति और अग्नि के अनुसार लिया जा सकता है।

2.⁠ ⁠सौंफ

भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में सौंफ ली जा सकती है। यह पाचन में सहायता कर सकती है।

3.⁠ ⁠मुलेठी

मुलेठी का उपयोग आयुर्वेद में ऊर्ध्वजत्रुगत एवं पाचन संबंधी विकारों में किया जाता है। H. pylori patient में इसका उपयोग व्यक्ति की प्रकृति, BP तथा अन्य रोगों को ध्यान में रखकर योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करें।

4.⁠ ⁠आहार में घी

यदि घी पाचन के अनुकूल हो तो भोजन में थोड़ी मात्रा में घी लिया जा सकता है। अत्यधिक घी या भारी भोजन से बचें।

5.⁠ ⁠भोजन की नियमितता

बहुत लंबे समय तक खाली पेट रहने और एक बार में बहुत अधिक भोजन करने से बचें।

6.⁠ ⁠भोजन के बाद

भोजन के तुरंत बाद न लेटें। कुछ समय सीधे बैठें या हल्की चाल से चलें।

H. pylori में क्या गलतियाँ नहीं करनी चाहिए?

•⁠ ⁠लंबे समय तक खाली पेट न रहें।
•⁠ ⁠अत्यधिक तीखा और खट्टा भोजन न करें।
•⁠ ⁠alcohol और smoking से बचें।
•⁠ ⁠बहुत अधिक चाय या coffee न लें।
•⁠ ⁠भोजन के तुरंत बाद न सोएँ।
•⁠ ⁠बार-बार painkillers का स्वयं से सेवन न करें।
•⁠ ⁠बिना चिकित्सकीय सलाह के अनेक herbal preparations एक साथ न लें।
•⁠ ⁠H. pylori की पुष्टि होने पर केवल घरेलू उपायों के भरोसे infection को नजरअंदाज न करें।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद में पेट में जलन, अम्लता, अजीर्ण, अरुचि और उदर संबंधी विकारों का मूल्यांकन दोष, अग्नि, आम, कोष्ठ और आहार-विहार के आधार पर किया जाता है।

H. pylori infection के साथ उपस्थित gastric symptoms में पित्तशामक, सुपाच्य और ताजा आहार, नियमित भोजन, उचित दिनचर्या तथा व्यक्ति की प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सा supportive भूमिका निभा सकती है।

महत्वपूर्ण

H. pylori एक bacterial infection है। आहार पेट की जलन, अपच और अन्य symptoms को manage करने में सहायता कर सकता है, लेकिन केवल diet को H. pylori eradication treatment का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। Confirmed infection में उचित चिकित्सकीय evaluation आवश्यक है।

यदि लगातार पेट दर्द, खून की उल्टी, काला मल, निगलने में कठिनाई, लगातार उल्टी, अचानक वजन कम होना या अत्यधिक कमजोरी हो तो तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।