आयुर्वेद में उच्च रक्तचाप का आधुनिक नाम से सीधा एकरूप वर्णन नहीं मिलता। इसके लक्षणों और रोगी की अवस्था को समझते हुए वात, पित्त, कफ, अग्नि, मन तथा रक्तवह स्रोतस की स्थिति का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया जाता है।
आहार-विहार का उद्देश्य दोषों का संतुलन, अग्नि का संरक्षण, मन की शांति, उचित जल-संतुलन तथा हृदय और रक्तवह स्रोतस के स्वास्थ्य को support करना है।
आयुर्वेद का सिद्धांत
“हिताहारोपयोगित्वं सुखं वा मनसः स्मृतम्।”
आयुर्वेद में हितकर आहार और संतुलित जीवनचर्या को स्वास्थ्य के आधारों में महत्वपूर्ण माना गया है।
BP में क्या खाना चाहिए?
प्रातःकाल
• गुनगुना पानी
• आंवला
• पपीता या सेब
• मूंग दाल का चीला
• दलिया
• 4–5 भीगे हुए बादाम
• 1–2 अखरोट
दोपहर का भोजन
• जौ, गेहूँ, ज्वार या बाजरे की रोटी
• मूंग या मसूर की दाल
• लौकी, तोरी, परवल, पालक, गाजर जैसी सब्जियाँ
• सलाद, यदि पाचन के अनुकूल हो
• उचित मात्रा में घी
• ताज़ा छाछ, यदि अनुकूल हो
शाम
• फल
• भुना चना
• मखाना
• सीमित मात्रा में nuts
• बिना चीनी का हल्का पेय
रात्रि भोजन
• मूंग दाल की खिचड़ी
• दाल
• हरी एवं पकी हुई सब्जियाँ
• जौ या गेहूँ की हल्की रोटी
• भोजन हल्का रखें और सोने से 2–3 घंटे पहले करें।
BP में कौन से फल खाएँ?
• आंवला
• अमरूद
• पपीता
• सेब
• नाशपाती
• अनार
• संतरा
• मौसंबी
• तरबूज उचित मात्रा में
फल ताज़े और साबुत रूप में लें।
किन फलों एवं खाद्य पदार्थों को सीमित करें?
• बहुत अधिक मीठे फल
• packaged fruit juice
• sugar-added fruit drinks
• बहुत अधिक dried fruits
• अत्यधिक processed foods
कौन से अनाज खाएँ?
• जौ
• गेहूँ
• ज्वार
• बाजरा
• रागी
• दलिया
• ओट्स
• साबुत अनाज
अनाज की मात्रा व्यक्ति की प्रकृति, अग्नि, वजन और दैनिक आवश्यकता के अनुसार रखें।
किन खाद्य पदार्थों से बचें?
• अत्यधिक नमक
• बहुत अधिक अचार
• पापड़ एवं नमकीन
• packaged एवं processed food
• chips एवं salted snacks
• अत्यधिक तला हुआ भोजन
• बहुत अधिक मिठाई
• अत्यधिक alcohol
• बहुत अधिक चाय एवं coffee
नमक का विशेष ध्यान
BP की समस्या में भोजन में अतिरिक्त नमक डालने की आदत कम करें। अचार, पापड़, नमकीन, packaged snacks और processed foods में छिपे हुए नमक का भी ध्यान रखें।
आयुर्वेदिक घरेलू उपाय
1. आंवला
आंवला को आयुर्वेद में रसायन एवं पित्तशामक द्रव्य के रूप में महत्व दिया गया है। इसे व्यक्ति की प्रकृति और अवस्था के अनुसार आहार में शामिल किया जा सकता है।
2. अर्जुन
अर्जुन त्वक् का उपयोग आयुर्वेद में हृदय संबंधी स्वास्थ्य के लिए वर्णित है। अर्जुन की औषधीय मात्रा एवं रूप का निर्धारण योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करें।
3. मानसिक तनाव कम करें
प्रतिदिन कुछ समय शांत वातावरण में बैठना, ध्यान एवं अपनी क्षमता के अनुसार योग करना मन को शांत रखने में सहायक हो सकता है।
4. नियमित भ्रमण
व्यक्ति की क्षमता के अनुसार नियमित walking करें। अत्यधिक exertion से बचें।
5. पर्याप्त नींद
रात्रि में पर्याप्त एवं नियमित नींद लें। देर रात तक जागने की आदत से बचें।
6. अभ्यंग
व्यक्ति की प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार तिल तेल से नियमित अभ्यंग किया जा सकता है। यह relaxation और वात संतुलन में सहायक हो सकता है।
BP में क्या गलतियाँ नहीं करनी चाहिए?
• BP की समस्या को नजरअंदाज न करें।
• अत्यधिक नमक का सेवन न करें।
• बार-बार packaged एवं processed food न लें।
• अत्यधिक alcohol का सेवन न करें।
• धूम्रपान से बचें।
• लगातार तनाव और रात्रि जागरण से बचें।
• अचानक बहुत अधिक strenuous exercise न करें।
• स्वयं से किसी औषधि या herbal preparation की मात्रा न बढ़ाएँ।
• नियमित BP monitoring को न छोड़ें।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में रक्तचाप को आधुनिक चिकित्सा की तरह एक स्वतंत्र रोग-नाम के रूप में वर्णित नहीं किया गया है। रोगी के लक्षण, दोष, अग्नि, मन, रक्तवह स्रोतस और हृदय की स्थिति के अनुसार उसका आयुर्वेदिक मूल्यांकन किया जाता है।
इसलिए उच्च रक्तचाप में हितकर आहार, कम लवण सेवन, नियमित दिनचर्या, मानसिक शांति, उचित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त निद्रा और व्यक्ति की अवस्था के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सा को महत्व दिया जाता है।
विशेष सावधानी
यदि BP बहुत अधिक हो और साथ में तेज सिरदर्द, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में कठिनाई, दृष्टि में अचानक बदलाव या बेहोशी जैसे लक्षण हों तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता आवश्यक है।

