page-header-img

कब्ज में आयुर्वेदिक आहार एवं घरेलू देखभाल

आयुर्वेद में कब्ज को मुख्यतः विबन्ध, मलावरोध तथा अपान वायु की विकृति के संदर्भ में समझा जाता है। रूक्षता, अनियमित भोजन, अग्निमांद्य, कम जल सेवन, वेगधारण तथा वात की वृद्धि के कारण मल का प्रवर्तन बाधित हो सकता है।

इसलिए कब्ज में आहार-विहार का उद्देश्य अग्नि को संतुलित करना, अपान वायु का अनुलोमन करना, आंत्र में उचित स्निग्धता बनाए रखना तथा मल के सहज निष्कासन में सहायता करना है।

आयुर्वेद का सिद्धांत

“जीर्णे हितं मितं चाद्यान्न वेगानीरयेद्बलात् ।
न वेगितोऽन्यकार्यः स्यान्नाजित्वा साध्यमामयम् ॥”

— अष्टाङ्गहृदय, सूत्रस्थान 2/19

अर्थात् पूर्व भोजन के पच जाने पर ही हितकर और उचित मात्रा में भोजन करना चाहिए तथा शरीर के प्राकृतिक वेगों को बलपूर्वक रोकना नहीं चाहिए। (Satyori)

कब्ज में क्या खाना चाहिए?

प्रातःकाल

•⁠ ⁠उठने के बाद पर्याप्त मात्रा में गुनगुना जल
•⁠ ⁠पका हुआ पपीता
•⁠ ⁠भीगे हुए मुनक्का या किशमिश
•⁠ ⁠दलिया
•⁠ ⁠मूंग दाल का हल्का चीला
•⁠ ⁠4–5 भीगे हुए बादाम

दोपहर का भोजन

•⁠ ⁠गेहूँ या जौ की रोटी
•⁠ ⁠मूंग या मसूर की दाल
•⁠ ⁠लौकी, तोरी, परवल, पालक, मेथी, गाजर जैसी पकी हुई सब्जियाँ
•⁠ ⁠उचित मात्रा में देसी घी
•⁠ ⁠ताज़ी छाछ, यदि पाचन के अनुकूल हो

शाम

•⁠ ⁠पका हुआ पपीता
•⁠ ⁠मुनक्का या किशमिश की उचित मात्रा
•⁠ ⁠मखाना
•⁠ ⁠गुनगुना पानी
•⁠ ⁠हल्का एवं सुपाच्य नाश्ता

रात्रि भोजन

•⁠ ⁠मूंग दाल की खिचड़ी
•⁠ ⁠दलिया
•⁠ ⁠पकी हुई हरी सब्जियाँ
•⁠ ⁠उचित मात्रा में घी
•⁠ ⁠भोजन हल्का रखें और सोने से लगभग 2–3 घंटे पहले करें।

कब्ज में कौन से फल खाएँ?

•⁠ ⁠पपीता
•⁠ ⁠नाशपाती
•⁠ ⁠सेब
•⁠ ⁠अमरूद उचित मात्रा में
•⁠ ⁠अनार
•⁠ ⁠संतरा/मौसंबी
•⁠ ⁠अंजीर
•⁠ ⁠मुनक्का
•⁠ ⁠किशमिश

फल ताज़े और व्यक्ति की पाचन क्षमता के अनुसार लें।

किन फलों की मात्रा सीमित रखें?

यदि किसी फल से कब्ज या पेट फूलना बढ़ता हो तो उसकी मात्रा कम करें।

•⁠ ⁠बहुत अधिक कच्चे फल
•⁠ ⁠बहुत अधिक केला
•⁠ ⁠अत्यधिक सूखे फल
•⁠ ⁠बहुत अधिक packaged fruit products
•⁠ ⁠फलों का अत्यधिक juice

कौन से अनाज खाएँ?

•⁠ ⁠जौ
•⁠ ⁠गेहूँ
•⁠ ⁠दलिया
•⁠ ⁠ओट्स
•⁠ ⁠बाजरा
•⁠ ⁠ज्वार
•⁠ ⁠रागी
•⁠ ⁠मूंग दाल की खिचड़ी

अनाज को पर्याप्त पानी के साथ अच्छी तरह पकाकर लेना अधिक उपयोगी रहता है।

किन खाद्य पदार्थों से बचें?

•⁠ ⁠बहुत अधिक सूखा भोजन
•⁠ ⁠बासी भोजन
•⁠ ⁠अत्यधिक तला हुआ भोजन
•⁠ ⁠बहुत अधिक processed food
•⁠ ⁠मैदा से बने खाद्य पदार्थ
•⁠ ⁠बहुत अधिक चाय-कॉफी
•⁠ ⁠अत्यधिक junk food
•⁠ ⁠भोजन की अत्यधिक मात्रा
•⁠ ⁠लंबे समय तक खाली पेट रहना

आयुर्वेदिक घरेलू उपाय

1.⁠ ⁠मुनक्का

रात्रि में उचित मात्रा में मुनक्का भिगोकर रखा जा सकता है। सुबह इसका सेवन व्यक्ति की प्रकृति एवं पाचन क्षमता के अनुसार किया जा सकता है।

2.⁠ ⁠त्रिफला

कब्ज की प्रकृति, रोगी की अवस्था और अग्नि के अनुसार त्रिफला का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से किया जा सकता है।

3.⁠ ⁠घृत का उचित प्रयोग

आहार में उचित मात्रा में घी का प्रयोग रूक्षता कम करने और वात के अनुलोमन में सहायक हो सकता है। मात्रा व्यक्ति की अग्नि, प्रकृति और स्वास्थ्य के अनुसार रखें।

4.⁠ ⁠अभ्यंग

नियमित रूप से तिल तेल से हल्का अभ्यंग वात की रूक्षता एवं शरीर की जकड़न में सहायक हो सकता है।

5.⁠ ⁠उदर पर हल्की गर्माहट

यदि व्यक्ति को अनुकूल हो तो पेट के क्षेत्र में हल्की गर्माहट दी जा सकती है। अत्यधिक गर्म सिकाई न करें।

6.⁠ ⁠नियमित शारीरिक गतिविधि

प्रतिदिन व्यक्ति की क्षमता के अनुसार हल्की walking एवं शारीरिक गतिविधि करें। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।

7.⁠ ⁠मलवेग को न रोकें

शौच की इच्छा होने पर उसे बार-बार रोकने की आदत न रखें। नियमित समय पर शौच की दिनचर्या बनाने का प्रयास करें।

कब्ज में क्या गलतियाँ नहीं करनी चाहिए?

•⁠ ⁠मलवेग को बार-बार न रोकें।
•⁠ ⁠बहुत कम पानी न पिएँ।
•⁠ ⁠लगातार सूखा भोजन न करें।
•⁠ ⁠अत्यधिक चाय-कॉफी का सेवन न करें।
•⁠ ⁠लंबे समय तक निष्क्रिय न रहें।
•⁠ ⁠बहुत अधिक तला-भुना और processed food न लें।
•⁠ ⁠बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक laxative या किसी भी औषधि का प्रयोग न करें।
•⁠ ⁠अचानक बहुत अधिक fiber शुरू न करें, विशेषकर यदि पेट में अत्यधिक गैस और bloating हो।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद में मल का सहज निष्कासन अपान वायु की सम्यक् गति से संबंधित है। जब वात की रूक्षता और अनियमितता बढ़ती है तथा अग्नि एवं कोष्ठ की स्थिति प्रभावित होती है, तब मलावरोध और विबन्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अतः कब्ज में वातानुलोमन, अग्नि-संतुलन, उचित स्निग्धता, पर्याप्त जल, सुपाच्य आहार, नियमित दिनचर्या और व्यक्ति की अवस्था के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सा को महत्व दिया जाता है।

विशेष सावधानी

यदि कब्ज के साथ लगातार तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट का अत्यधिक फूलना, मल में रक्त, काला मल, बिना कारण वजन कम होना या कई दिनों तक मल एवं वायु का बिल्कुल निष्कासन न होना जैसी समस्या हो तो चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।