आयुर्वेद में पेट में गैस, अफारा, डकार और पेट फूलने जैसे लक्षणों को मुख्यतः वात दोष की विकृति तथा अग्निमांद्य और अजीर्ण के संदर्भ में समझा जाता है। अनुचित आहार, भोजन का अनियमित समय, अधिक मात्रा में भोजन और कमजोर पाचन शक्ति इसके प्रमुख कारणों में हो सकते हैं।
इसलिए गैस की समस्या में आहार-विहार का उद्देश्य अग्नि को संतुलित करना, वात का शमन करना और पाचन को सुचारु रखना है।
Gas में क्या खाना चाहिए?
प्रातःकाल
• गुनगुना पानी
• अदरक का हल्का गर्म पेय
• मूंग दाल का हल्का चीला
• दलिया
• हल्की खिचड़ी
• 4–5 भीगे हुए बादाम
दोपहर का भोजन
• मूंग दाल
• जौ या गेहूँ की रोटी
• लौकी, तोरी, परवल, गाजर और कद्दू जैसी पकी हुई सब्जियाँ
• भोजन में थोड़ी मात्रा में देसी घी
• ताज़ी छाछ, यदि पाचन के अनुकूल हो
शाम
• भुना हुआ चना, यदि इससे गैस न बढ़ती हो
• मखाना
• सौंफ
• गुनगुना पानी
रात का भोजन
• मूंग दाल की खिचड़ी
• मूंग दाल
• हल्की एवं अच्छी तरह पकी सब्जियाँ
• दलिया
• रात का भोजन हल्का रखें और सोने से 2–3 घंटे पहले करें।
Gas में कौन से फल खाएँ?
• पका हुआ पपीता
• अनार
• पका हुआ केला, यदि अनुकूल हो
• सेब, उचित मात्रा में
• नाशपाती, यदि इससे गैस न बढ़ती हो
• मौसमी फल, व्यक्ति की पाचन क्षमता के अनुसार
फल एक समय में उचित मात्रा में लें और भोजन के तुरंत बाद अधिक मात्रा में फल न खाएँ।
किन फलों की मात्रा सीमित रखें?
यदि इनसे गैस या पेट फूलना बढ़ता हो तो इनकी मात्रा कम करें:
• बहुत अधिक कच्चे फल
• अत्यधिक मीठे फल
• बहुत अधिक अमरूद
• बहुत अधिक नाशपाती
• dried fruits की अधिक मात्रा
• packaged fruit juice
कौन से अनाज खाएँ?
• जौ
• गेहूँ
• चावल उचित मात्रा में
• दलिया
• मूंग दाल की खिचड़ी
अनाज को अच्छी तरह पकाकर और उचित मात्रा में लें।
किन अनाज एवं खाद्य पदार्थों से बचें?
• बहुत अधिक राजमा
• बहुत अधिक छोले
• अत्यधिक चना
• बहुत अधिक उड़द दाल
• बहुत अधिक तला हुआ भोजन
• बासी भोजन
• अत्यधिक सूखा भोजन
• packaged एवं ultra-processed foods
• carbonated drinks
• बहुत अधिक चाय और coffee
• alcohol
• बार-बार बाहर का भोजन
यदि किसी विशेष दाल या खाद्य पदार्थ से बार-बार गैस होती है तो उसकी मात्रा कम करें या उसे कुछ समय के लिए भोजन से हटाकर देखें।
आयुर्वेदिक घरेलू उपाय
1. सौंफ
भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में सौंफ चबाई जा सकती है। यह पाचन में सहायता कर सकती है।
2. अजवाइन
अजवाइन का सीमित मात्रा में उपयोग भोजन के बाद किया जा सकता है। यदि acidity या पित्त की समस्या बढ़ती हो तो इसका प्रयोग कम करें।
3. अदरक
भोजन में थोड़ी मात्रा में अदरक का प्रयोग पाचन के लिए किया जा सकता है, यदि यह व्यक्ति को अनुकूल हो।
4. भोजन अच्छी तरह चबाएँ
भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएँ। जल्दी-जल्दी खाने से पेट में वायु और bloating बढ़ सकती है।
5. भोजन के बाद हल्की चाल
भोजन के बाद थोड़ी देर हल्का चलना पाचन के लिए उपयोगी हो सकता है। भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें।
6. नियमित भोजन
बहुत लंबे समय तक खाली पेट रहने और फिर एक साथ बहुत अधिक भोजन करने से बचें।
Gas में क्या गलतियाँ नहीं करनी चाहिए?
• बहुत जल्दी-जल्दी भोजन न करें।
• भोजन को अच्छी तरह चबाए बिना न निगलें।
• एक बार में बहुत अधिक भोजन न करें।
• भोजन के तुरंत बाद न सोएँ।
• बहुत अधिक ठंडे पेय न लें।
• बार-बार carbonated drinks न लें।
• अत्यधिक तला हुआ और भारी भोजन न करें।
• बार-बार बाहर का भोजन न करें।
• बिना कारण लगातार अलग-अलग घरेलू नुस्खे न बदलते रहें।
• लंबे समय तक बनी रहने वाली गैस को केवल घरेलू उपायों से नजरअंदाज न करें।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में गैस और पेट फूलने की समस्या को वात दोष, अग्निमांद्य, अजीर्ण तथा आम की स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। अनुचित एवं विरुद्ध आहार, अनियमित भोजन और कमजोर पाचन शक्ति वात को विकृत कर सकती है।
इसलिए गैस की समस्या में वातशामक एवं सुपाच्य आहार, नियमित भोजन, उचित दिनचर्या, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि तथा व्यक्ति की अवस्था के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सा को महत्व दिया जाता है।
यदि पेट फूलने के साथ लगातार तेज पेट दर्द, बार-बार उल्टी, खून आना, काला मल, बिना कारण वजन कम होना या पेट में लगातार कठोरता/सूजन जैसी समस्या हो तो चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।

